समावेश

साहित्य की दुनिया में अलग-अलग विषयों को केंद्र में रखकर अनेक विधाओं में लिखा गया जो विमर्श का हिस्सा बना। आज जब हम पलटकर देखते हैं तो पाते हैं कि फ़िल्म से लेकर साहित्य तक में विकलांगजन अपनी उपस्थिति उस तरह दर्ज नहीं करा पाए । पिछले एक दशक में कुछ एक फिल्में ज़रूर आयीं और जागरूकता में उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। साहित्य में ऐसा ठोस कुछ नज़र नहीं आता, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि निजी तौर पर लोगों ने इस विषय पर लिखा है । इसी दिशा में  हमारा यह प्रयास है। हमारा उद्देश्य एक ऐसी किताब बनाना है जिसके केंद्र में विकलांगता से जुड़े तमाम मुद्दे शामिल हो। आप सभी की रचनाएं इस किताब के लिए आमंत्रित हैं । जो भी रचनाएं हमारे संपादक मण्डल द्वारा चुनी जाएंगी उन्हें कविताकोश के बैनर तले पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा ।

– रचना (ग़ज़ल, कविता, नज़्म, गीत, नवगीत इत्यादि) किसी भी रूप में लिखी जा सकती है।
– रचना का विषय विकलांगता केन्द्रित होना चाहिए ।
– रचना हिंदी, उर्दू, हिंदुस्तानी भाषाओं में हो और देवनागरी लिपि में ही यूनिकोड (मंगल) फ़ॉन्ट में भेजी जाए।
– रचना पूरी तरह मौलिक होनी चाहिए और पूर्व में किसी भी रूप में प्रकाशित न हुई हो।
– रचना का शीर्षक रचनाकार को स्वयं लिखना होगा।
– रचना किसी भी आयुवर्ग का व्यक्ति भेज सकता है।
– एक रचनाकार की अधिकतम दो रचनाएं स्वीकार की जाएँगी।
– रचनाओं के लिए कोई मानदेय / रॉयल्टी नहीं दी जा सकेगी।
– प्राप्त सभी रचनाओं में से चुनिंदा रचनाओं को कविता कोश के “साहित्य में विकलांगता विमर्श” अनुभाग में शामिल किया जायेगा।
– चुनी गयी श्रेष्ठ रचनाओं को पुस्तक के रूप में भी प्रकाशित किया जायेगा।
– रचनाओं के चुनाव का अंतिम अधिकार संपादक मण्डल का होगा।

प्रयास

ललित कुमार

संपादक

दिव्यांग व्यक्तियों के रोल मॉडल होने के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित ललित कुमार कविता कोश, गद्य कोश, दशमलव और Wecapable जैसी समाजोपयोगी परियोजनाओं के संस्थापक हैं। बहुचर्चित विटामिन ज़िन्दगी उनके संस्मरणों का संग्रह है।

स्वप्निल तिवारी

संपादक

स्वप्निल तिवारी, हिंदी फ़िल्मों और हिंदी धारावाहिकों में स्क्रिप्ट राइटर और गीतकार के रूप में अपनी पहचान रखते है | ग़ज़ल विधा में सिद्धहस्त स्वप्निल तिवारी जी का एक ग़ज़ल संग्रह ‘चाँद डिनर पर बैठा है’ हिंदी और उर्दू दोनों लिपियों में प्रकाशित हो चुका है|

शारदा सुमन

संयोजक

हिन्दी भाषा से परास्नातक शारदा सुमन कविता कोश और गद्यकोश की निदेशक हैं। इन्होंने उत्तर भारत की लोकभाषाओं, लोकगीतों और हिन्दी के विशाल साहित्य को कविता कोश/गद्य कोश  के माध्यम से सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। वे श्वेतवर्णा प्रकाशन की संस्थापक भी हैं।

गौरव सक्सेना

संयोजक

गौरव सक्सेना, पेशे से स्पेशल एजुकेटर होने के साथ ही साथ कवि व रंगकर्मी भी है | कविता, नज़्म और शायरी में अपनी विशेष पहचान रखने वाले गौरव सक्सेना जी दिव्यांग जनो के लिए हमेशा ही कुछ ना कुछ करने की कोशिश करते रहेते है, वे समावेश के विचार के सृजक भी है|